कचरा लाओ, पैसे पाओ: हल्द्वानी शहर सहित इन तीन जगहों में अनोखी पहल; खाली प्लास्टिक बोतल और चिप्स कुरकुरे का पैकेट दे और पाये ₹2 प्रति पीस

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हल्द्वानी सहित जिले को प्रदूषण मुक्त बनाने और सड़कों को कचरे से निजात दिलाने के लिए उत्तराखंड में एक अनोखी और पर्यावरण-हितैषी पहल शुरू की गई है। अब लोग सड़कों पर खाली प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के पैकेट या कोल्ड ड्रिंक के केन फेंकने के बजाय, उन्हें वापस करके कमाई कर सकेंगे। सरकार ने इसके लिए हैदराबाद की एक नामी रिसाइकिल कंपनी से टाईअप किया है। इस योजना के तहत उपभोक्ताओं को कचरा वापस करने पर प्रति आइटम ₹2 का रिफंड दिया जा रहा है।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत ‘सबका साथ स्वच्छ उत्तराखंड’ थीम

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शुक्रवार को हल्द्वानी नगर निगम के सामने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ‘सबका साथ स्वच्छ उत्तराखंड’ थीम पर एक विशेष स्टाल लगाया गया है। इस स्टाल के माध्यम से आम जनता को इस मुहिम के प्रति जागरूक किया गया। लोगों को बताया गया कि वे अपने घरों या आसपास का खाली प्लास्टिक कचरा फेंकने के बजाय यहाँ जमा कराएं, जिससे सीधे उनके बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर किए जा सकें। हल्द्वानी नगर निगम कार्यालय के बाहर स्वच्छ भारत मिशन के तहत काउंटर लगाया गया है जहां बड़ी संख्या में लोग अपना पूरा कचरा और प्लास्टिक के आइटम दे रहे हैं और ऑनलाइन भुगतान का रहे। फिलहाल यह पहले चरण में एक महीने तक अभियान चलेगा

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हल्द्वानी, भीमताल और कॉर्बेट पार्क में चल रहा है डेमो

स्टाल पर तैनात कर्मचारियों ने बताया कि वर्तमान में इस योजना का ट्रायल (डेमो) कुमाऊं के तीन प्रमुख क्षेत्रों— हल्द्वानी, भीमताल और रामनगर स्थित प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क में चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को सड़कों व जंगलों में कचरा फेंकने से रोकना और रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देना है।

ऐसे काम करेगी तकनीक: क्यूआर कोड स्कैन होते ही खाते में आएंगे पैसे

कचरे के बदले पैसे देने की यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी है। स्टाल कर्मी के मुताबिक:
जब कोई व्यक्ति खाली बोतल, टेट्रा पैक या चिप्स का पैकेट लेकर स्टाल पर आता है, तो उस वस्तु पर ‘रिटर्न अर्न रिसाइकल’ का एक विशेष क्यूआर कोड (QR Code) लगाया जाता है।

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इसके बाद हैंड स्कैनिंग डिवाइस से उस क्यूआर कोड को स्कैन किया जाता है।

स्कैनिंग की प्रक्रिया पूरी होते ही संबंधित उपभोक्ता के बैंक खाते में ₹2 की रिफंड राशि डिजिटल माध्यम से ट्रांसफर हो जाती है।

अगर यह पायलट प्रोजेक्ट इन तीन शहरों में सफल रहता है, तो आने वाले दिनों में इसे पूरे उत्तराखंड में लागू किया जा सकता है, जिससे राज्य को प्लास्टिक कचरे से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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