Nainital News:कटहल के पेड़ पर चढ़ा गुलदार, लोगों ने देखा तो मचा हड़कंप, वन विभाग ने किया रेस्क्यू-देखें-VIDEO
लुटाबड़ गांव में सुबह मादा गुलदार खेत में कटहल के पेड़ पर चढ़ गई। गुलदार को पेड़ पर देख ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने गुलदार को रेस्क्यू कर लिया। उसे जंगल में छोड़ने के लिए ले जाया जा रहा है।
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के रामनगर अंतर्गत लुटाबड़ गांव में मंगलवार सुबह ग्रामीणों ने गुलदार को कटहल के पेड़ पर चढ़े देखा तो आमपोखरा रेंज के रेंजर पूरन सिंह खनायत को सूचना दी। वन विभाग ने मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक देहरादून से अनुमति लेने के बाद उसे रेस्क्यू करने की योजना बनाई।
कार्बेट के पशु चिकित्सक दुष्यंत शर्मा को गुलदार को रेस्क्यू करने के लिए मौके बुलाया गया। इस दौरान ग्रामीणों का भी गुलदार को देखने के लिए मजमा लग गया। वन कर्मियों को भीड़ को हटाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बाद डा. दुष्यंत शर्मा ने ट्रैंकुलाइज गन से करीब 30 मीटर की दूरी से गुलदार को बेहोशी की दवा मिली डाट मारी।
गुलदार के डाट लगते ही वह नीचे उतरने लगा और फिर बेहोश हो गया। उसे वन विभाग की टीम ने घेर लिया। इसकेे बाद उसका परीक्षण किया गया। गुलदार को देखने व फोटाे खींचने के लिए लोगों की भीड़ लग गई।
गुलदार को वन कर्मियों ने पिजंड़े में रखा। इस बीच गुलदार होश में आ गया। उप प्रभागीय वनाधिकारी संदीप गिरी ने बताया कि गुलदार ठीक है। उसकी उम्र तीन से चार साल आंकी गई है। उसे जंगल छोड़ने के लिए ले जाया जा रहा है।
अनुमति के बाद शुरू हुआ ऑपरेशन
आमपोखरा रेंज के रेंजर पूरन सिंह खनायत ने घटना की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी। देहरादून स्थित मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक से रेस्क्यू की अनुमति मिलने के बाद कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. दुष्यंत शर्मा को मौके पर बुलाया गया।
30 मीटर की दूरी से सटीक निशाना
भीड़ के कारण रेस्क्यू में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वन कर्मियों ने कड़ी मशक्कत कर ग्रामीणों को पीछे हटाया। इसके बाद डॉ. दुष्यंत शर्मा ने मोर्चा संभाला:
दूरी: पेड़ से करीब 30 मीटर दूर रहकर पोजीशन ली गई।
एक्शन: ट्रैंकुलाइज गन से बेहोशी की दवा वाली डॉट गुलदार को मारी गई।
असर: डॉट लगते ही गुलदार पेड़ से नीचे उतरने लगा और कुछ ही देर में अचेत हो गया।
मेडिकल चेकअप के बाद पिंजरे में कैद
बेहोश होने के बाद वन विभाग की टीम ने उसे जाल से घेर लिया। परीक्षण के दौरान गुलदार पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। हालांकि, जब उसे पिंजरे में डाला गया, तब तक उसे होश आ गया था। उप प्रभागीय वनाधिकारी संदीप गिरी ने बताया कि मादा गुलदार की उम्र लगभग 3 से 4 साल है।
“गुलदार का सफल रेस्क्यू कर लिया गया है। वह पूरी तरह फिट है, इसलिए उसे उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सुरक्षित प्राकृतिक वास (जंगल) में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।”
— संदीप गिरी, उप प्रभागीय वनाधिकारी
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