होलिका दहन पर जरूर करें ये अचूक उपाय…रोज-रोज के क्लेश से मिलेगा छुटकारा, घर में होने लगेगी धन वर्षा!

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होलिका दहन हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. यह पर्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी इसका विशेष महत्व है. इस दिन विशेष पूजन और उपाय करने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. सफलता प्राप्ति के लिए, लोग कई प्रकार के टोटके और उपाय करते हैं, जिनमें होलिका दहन के समय अग्नि में नारियल, पान और सुपारी अर्पित करना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है.

इस साल होलिका दहन 13 मार्च को मनाया जाएगा. इस दिन विशेष उपाय करने से सफलता और समृद्धि के मार्ग खुलते हैं. अग्नि में नारियल, पान और सुपारी अर्पण करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता आती है और उसे अपने लक्ष्य प्राप्त करने में सहायता मिलती है. यदि यह उपाय सच्चे मन और श्रद्धा से किया जाए, तो अवश्य ही शुभ फल प्राप्त होते हैं।

होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन किया जाता है। साल 2025 में होलिका दहन की तिथि 13 मार्च है। शुभ मुहूर्त रात 11.26 बजे से 12.30 बजे तक है। माना जाता है कि होलिका दहन करने से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। परिवार के सभी सदस्यों को होलिका की परिक्रमा करनी चाहिए और होलिका की राख को शरीर पर लगाने का भी महत्व है।

होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन किया जाता है, जब चंद्रमा अपनी पूर्ण शक्ति में होता है और वातावरण में विशेष ऊर्जा प्रवाहित होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी और होलिका नामक राक्षसी को अग्नि में भस्म कर दिया था. यही कारण है कि इस दिन किए गए उपाय व्यक्ति के जीवन में सफलता, समृद्धि और उन्नति के द्वार खोलते हैं.

होलिका दहन में क्या-क्या चढ़ाएं

  1. नारियल अर्पण का महत्व
    नारियल को हिंदू धर्म में शुभ और पवित्र माना जाता है. यह समृद्धि, शुद्धता और उन्नति का प्रतीक होता है. जब इसे होलिका दहन की अग्नि में चढ़ाया जाता है, तो यह हमारे अंदर की नकारात्मकता और बुरी शक्तियों को दूर कर सफलता के मार्ग को प्रशस्त करता है.

2 पान अर्पण का महत्व
पान का प्रयोग शुभ कार्यों में किया जाता है. यह मां लक्ष्मी और भगवान गणेश को प्रसन्न करने का एक माध्यम माना जाता है. होलिका दहन की अग्नि में पान चढ़ाने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और आर्थिक समृद्धि में वृद्धि होती है.
सुपारी को भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है. इसे अग्नि में अर्पित करने से सभी प्रकार की बाधाएं समाप्त होती हैं और व्यक्ति को अपने कार्यों में सफलता मिलती है. यह न केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी व्यक्ति को आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प प्रदान करता है.

नरसिंह भगवान से प्रार्थना करते हुए होलिका की आग में गेहूं, चने की बालियां, जौ, गोबर के उपले आदि डालें। इसके बाद होलिका की आग में गुलाल और जल चढ़ाएं।

3 होलिका दहन से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. मन में सफलता प्राप्ति के लिए संकल्प लें.अग्नि जलने के बाद, होलिका की तीन या सात बार परिक्रमा करें और प्रत्येक परिक्रमा के साथ अपनी इच्छाओं को प्रकट करें. पहले नारियल, फिर पान और अंत में सुपारी अग्नि में अर्पित करें और भगवान से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करें. होलिका दहन के बाद प्रसाद ग्रहण करें और अपने परिवार के साथ इसे साझा करें.

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