उत्तराखंड:महिला प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगों ने लूटे 1.11 करोड़,घटना जान हो जाएंगे हैरान

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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की वरिष्ठ प्राध्यापिका से हुई 1.11 करोड़ की ठगी के मामले में पुलिस ने रविवार देर रात मामला दर्ज कर दिया। साथ ही जिले की साइबर टीम ने मामले में जांच शुरू कर दी है। इधर, सोमवार को भी साइबर ठग लगातार प्रोफेसर को फोन करते रहे।

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मामला कोटद्वार सामने आया है जहां रविवार शाम कोटद्वार कोतवाली में पहुंची राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की एक प्रोफेसर ने साइबर ठगी से संबंधित तहरीर पुलिस को दी। बताया कि आठ दिसंबर को उन्हें अज्ञात नंबर से फोन आया।

फोन करने वाले ने स्वयं को टेलीकाम डिपार्टमेंट बेंगलुरु का कर्मी बताते हुए कहा कि उनके नंबर से 17 युवतियों को गलत मैसेज भेजे हैं, जिसमें से एक युवती ने आत्महत्या का प्रयास भी किया है। उक्त व्यक्ति ने उन्हें बेंगलुरु के इंदिरानगर पुलिस स्टेशन में आने को कहा।

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उनके द्वारा स्वयं को सीनियर सिटीजन बताते हुए बेंगलुरु आने में असमर्थता जताई गई तो उक्त व्यक्ति ने उनका संपर्क एक अन्य व्यक्ति से करवाया, जिसने स्वयं को इंस्पेक्टर बताया। उक्त व्यक्ति ने उन्हें क्वारंटीन होने को कहा और करीब 40 मिनट तक पूछताछ की।

15 दिसंबर को पुन: उक्त व्यक्ति का फोन आया व उसने बताया कि उनका नाम एक ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस के संदिग्धों में शामिल है व उनके नाम से मुंबई के कैनरा बैंक में तीन करोड़ रुपये हैं। उक्त व्यक्ति ने 16 दिसंबर को उन्हें सीबीआइ अधिकारी के समक्ष बैठने की बात की।

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साइबर अपराधी महिला प्रोफेसर को व्हाट्सएप पर लगातार उन लोगों ने संपर्क बनाकर रखा और डराते धमकाते रहे। किसी से संपर्क करने की बात कहने पर उनके द्वारा कहा गया कि जिससे भी आप अपने मोबाइल से संपर्क करेंगे, वह भी मुसीबत में पड़ जाएंगे। इस कारण वह किसी से संपर्क नहीं कर सकीं और 11 दिन तक दहशत में रही।वरिष्ठ प्राध्यापिका के भाई ने उनसे कई बार रुपयों की आवश्यकता के बारे में पूछा, लेकिन प्रोफेसर ने नहीं बताया। भाई ने रुपया ट्रांसफर करने की कोशिश भी की, लेकिन बहन के खाते में पैसा किसी कारण नहीं पहुंच पाया। आखिरकार भाई ने भावुक होकर बहन से रुपयों की आवश्यकता का कारण पूछा, तो प्रोफेसर ने घटना की जानकारी दी। इसके बाद भाई के कहने पर उन्होंने रुपये ट्रांसफर न करने का मन बनाया और फिर पुलिस से शिकायत दी गई।

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महाविद्यालय की प्रोफेसर को आठ दिसंबर से 19 दिसंबर तक डिजिटल अरेस्ट करने वाले ठगों के फोन सोमवार को भी आते रहे। प्रोफेसर की ओर से इस संबंध में भी पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस ने अज्ञात नंबर से आने वाली किसी भी काल को रिसीव न करने को कहा।

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