उत्तराखंड में 2027 की चुनावी सुगबुगाहट तेज,उत्तराखंड में भाजपा की हैटट्रिक रणनीति

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उत्तराखंड की राजनीति में बीते कुछ समय से हलचल साफ तौर पर देखी जा रही है. एक ओर जहां कांग्रेस लगातार सड़कों पर उतरकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने भी संगठनात्मक स्तर पर अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं. केंद्रीय नेताओं के दौरे, कोर ग्रुप की बैठकें और सरकार के बड़े फैसले इस बात के संकेत हैं कि प्रदेश की सियासत अब पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है।

हालांकि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से रणनीति बनानी शुरू कर दी है. आमतौर पर भाजपा यह दावा करती रही है कि वह सालभर चुनावी मोड में रहती है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि अब चुनावी बिगुल बज चुका है. वजह यह भी है कि उत्तराखंड में परंपरागत रूप से चुनाव से ठीक एक साल पहले राजनीतिक गतिविधियां अपने चरम पर पहुंच जाती हैं।

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वर्ष 2022 में दोबारा प्रचंड बहुमत मिला, लेकिन सीट 57 से घटकर 47 रह गईं। जीत की हैटट्रिक के लिए सीटों में आए इस अंतर के कारणों की तह में जाने की तैयारी है, ताकि इसे पाटा जा सके।

साथ ही कुल 23 सीटों पर पार्टी हार के कारणों का गहराई में जाकर पता कर रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि पार्टी हारी हुई सीटों पर जीत दर्ज करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसके बाद बूथों को मजबूत करने की विशेष रणनीति पर काम किया जा रहा है।

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बूथ इकाइयों का मनोबल बढ़ाने के लिए वरिष्ठ नेताओं के प्रवास कार्यक्रम तय किए जा रहे हैं। बीएलए-टू बनाने का कार्य 80 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है।

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