Uttarakhand News:धामी कैबिनेट की बड़ी बैठक,लिए गए कई महत्वपूर्ण फैसले, नई आबकारी नीति लागू

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उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई। इस बैठक में 14 प्रस्तावों पर कैबिनेट की मुहर लगी। बैठक में आगामी बजट सत्र को देहरादून में आयोजित करने पर कैबिनेट ने अपनी संस्तुति दी। अभी बजट सत्र की तारीख का ऐलान नहीं किया गया है। इसके अलावा नई आबकारी नीति को भी कैबिनेट में मंजूरी मिली है आबकारी विभाग को नए सत्र में 4400 करोड़ के राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य दिया गया है। कैबिनेट बैठक में मंत्री गणेश जोशी, सतपाल महाराज, प्रेमचंद अग्रवाल, सौरभ बहुगुणा रेखा आर्या मौजूद रहे। मंत्रिमंडल की बैठक में फैसलों को लेकर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जानकारी दी।

राज्य की आबकारी नीति को और भी अधिक पारदर्शी बनाते हुए उत्तराखंड सरकार ने मिलावटी शराब को रोकने, ब्रांड उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा राजस्व बढ़ाने की दृष्टि से उत्तराखण्ड आबकारी नीति विषयक नियमावली 2024 के तहत अहम कदम उठाये हैं ।

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वर्तमान वित्तीय वर्ष 2023-24 के राजस्व लक्ष्य ₹ 4000 करोड़ के सापेक्ष 11% की वृद्धि के साथ वित्तीय वर्ष 2024-2025 के लिए ₹ 4440 करोड़ का लक्ष्य दिया गया है। इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्र में इनोवेशन और निवेश को प्रोत्साहन के लिए माइक्रो डिस्टिलेशन ईकाई की स्थापना का प्राविधान किया गया है, जिसे सूक्ष्म उद्योगों की श्रेणी में कम से कम क्षेत्रफल में स्थापित किया जा सकेगा जो कि आर्थिक रूप से सक्षम होने के साथ हिमालयी क्षेत्र की पर्यावरणीय मानकों के अनुकूल होने से स्थानीय पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रदेश में पर्यटन प्रोत्साहन एवं स्थानीय रोजगार की दृष्टि से पर्वतीय तहसील एवं जनपदो में मॉल्स डिपार्टमेन्टल स्टोर में मदिरा बिक्री का अनुज्ञापन शुल्क ₹.05 लाख (पाँच लाख)/ दुकान का न्यूनतम क्षेत्रफल 400 वर्गफुट का प्रविधान किया है। विगत वर्ष से भिन्न स्टार कैटेगरी के अनुसार बार अनुज्ञापन शुल्क निर्धारित किया गया है, इसी प्रकार पर्यटन की दृष्टि से सीजनल बार अनुज्ञापन शुल्क का प्रावधान किया गया है।परपरागत रूप से अवैध कच्ची शराब के उत्पादन क्षेत्रों में लगातार प्रभावी प्रवर्तन कार्यवाही करने तथा ऐसे क्षेत्रों में वैध मदिरा के विक्रय को प्रोत्साहन करने हेतु उप दुकान का प्राविधान किया गया है।

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मदिरा की आपूर्ति के लिये थोक व्यवस्था का प्रावधान: इस नीति में विदेशी मदिरा की बॉटलिंग के लिए आबकारी राजस्व और निवेश के लिए पहली बार प्रावधान किया जा रहा है, ताकि उत्तराखंड राज्य, उत्पादक और निर्यातक राज्य के रूप में स्थापित हो सके. प्रदेश में विदेशी मदिरा के थोक व्यापार को उत्तराखंड के मूल/स्थायी निवासियों को रोजगार देने के लिए भारत में निर्मित विदेशी मदिरा की आपूर्ति के थोक व्यापार की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है. उत्तराखंड सरकार ने आबकारी राजस्व को बढ़ाने के लिए पहली बार ओवरसीज मदिरा की आपूर्ति के लिये थोक व्यवस्था FL-2(O) का प्रावधान किया है, जिससे कस्टम बॉन्ड से आने वाली ओवरसीज मदिरा के व्यापार को राजस्व बढ़ाने की दिशा में नियंत्रित किया जा सकेगा.नई आबकारी नीति में देखा गया किसानों का हित: नई आबकारी नीति में राज्य की कृषि एवं बागवानी से जुड़े किसानों के हितों को देखते हुए देशी शराब में स्थानीय फलों (कीनू, माल्टा, काफल, सेब, नाशपाती, तिमूर, आडू आदि) को शामिल किया गया है. साथ ही शराब दुकानों का आवंटन या नवीनीकरण, दो चरणों के तहत लिया जाएगा. जिसके तहत लॉटरी और “पहले आओ पहले पाओ” के आधार पर किया जाएगा. ये निर्णय पारदर्शी और अधिकतम राजस्व एकत्र को लेकर लिया गया है. शराब की दुकानों का नवीनीकरण उन्ही लोगों का किया जाएगा, जिनकी प्रतिभूतियां सुरक्षित हों।

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