Earthquake:नेपाल में देर रात भूकंप से 70 से अधिक लोगों की मौत,कई घर ध्वस्त

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देर रात आई भूकंप ने तबाही मचाई है मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी नेपाल में भूकंप से अब तक 70 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाली अधिकारियों ने बताया कि रुकुम पश्चिम में 40 लोगों की मौत हो हुई है तो वहीं जाजरकोट में 30 लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। रेस्क्यू फोर्स बचाव अभियान में जुट गई है। बता दें, शुक्रवार रात करीब 11.30 बजे नेपाल के पश्चिमी इलाके में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे।

एक परिवार के पांच लोगों की मौत

पड़ोसी रुकुम पश्चिम जिले के एक पुलिस अधिकारी नामराज भट्टाराई ने रॉयटर्स को बताया कि हमने रिपोर्ट की पुष्टि की है कि आथबिस्कोट गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई है और भी मौतों की खबरें हैं। अधिकारी ने कहा कि हालांकि इसकी पुष्टि नहीं कर सकते। जाजरकोट में मीडिया फुटेज में बहुमंजिला ईंट के मकानों के टूटे हुए हिस्से दिखाई दे रहे हैं। निवासियों ने बताया कि झटके पड़ोसी जिलों और काठमांडू तक महसूस किए गए।

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रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.4 मापी गई है।
इसके झटके उत्तर भारत के राज्यों से होते हुए दिल्ली-एनसीआर तक महसूस किए गए। बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, नोएडा समेत पूरे यूपी और बिहार में भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेपाल में इससे क्या नुकसान हुआ है, इसकी जानकारी अभी नहीं मिल सकी है। लेकिन भूकंपीय गतिविधियों के ट्रेंड को अगर आप देखेंगे तो पाएंगे कि नेपाल में भूकंप काफी आते हैं।

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राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अधिकारियों के अनुसार, रात 11.47 बजे भूकंप आया, जिसका केंद्र जाजरकोट जिले के लामिडांडा क्षेत्र में था। काठमांडू और आसपास के इलाकों में भूकंप का तेज झटका महसूस किया गया।

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अधिकारियों के अनुसार, रात 11.47 बजे भूकंप आया, जिसका केंद्र जाजरकोट जिले के लामिडांडा क्षेत्र में था। काठमांडू और आसपास के इलाकों में भूकंप का तेज झटका महसूस किया गया।

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नेपाल में क्यों आते हैं भूकंप

नेपाल में भूकंप को समझने के लिए आपको हिमालय को देखना होगा। इस क्षेत्र में पृथ्वी की इंडियन प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे दब रही है। हर साल पांच सेंटीमीटर यह प्लेट दबती है। इस कारण हिमालय 5 मिलीमीटर ऊपर उठता जा रहा है। प्लेट दबने से चट्टानों के ढांचे में एक तनाव पैदा हो जाता है। जब यह तनाव चट्टानें बर्दाश्त नहीं कर पातीं तो भूकंप आता है।

वैज्ञानिक अभी भी भूकंप के आने का अंदाजा नहीं लगा सकते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में यह ज्यादा आने की आशंका है।

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