Ayodhya Ram Mandir :नैनीताल में भारत रत्न पं.गोविंद बल्लभ पंत की मूर्ति पर माल्यार्पण कर किया हनुमान चालीसा पाठ-देखे-VIDEO

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नैनीताल: 22 जनवरी को अयोध्या में श्री राम लला मंदिर में उनकी प्राण प्रतिष्ठा होनी है. मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से पहले जगह-जगह विभिन्न तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है इसी के तहत बुधवार को नैनीताल के पंत पार्क में पंत जयंती समारोह पदाधिकारीयो ने भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत के मूर्ति पर माल्यार्पण कर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें भारी संख्या में महिलाएं और पुरषो ने भाग लिया.

इस मौके पर वक्ताओ ने कहा कि अयोध्या में भव्य मंदिर में श्री राम लाल के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी है जिसको लेकर लोगों ने भारी खुसी है. इस दौरान लोगों ने भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,गृहमंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के करोड़ों लोगों के आस्था भगवान श्री राम मंदिर को समर्पित करने जा रहे हैं जो देश के लिए गौरव की बात है. इस मौके पर हनुमान चालीसा पाठ का भी आयोजन किया गया. समिति के पदाधिकारीयो ने कहा कि राम मंदिर निर्माण की पहली नींव भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने रखी थी जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करोड़ लोगों की राम मंदिर की सपना को साकार करने का काम किया है.
इस मौके पर गोविंद बल्लभ पंत जयंती के उत्तराखंड प्रदेश के मुख्य संयोजक गोपाल सिंह रावत ने कहा कि जिस मंदिर को बाबरी मस्जिद का नाम दिया गया था वह भगवान श्री राम का मंदिर था. जिस जगह पर राम मंदिर बनकर तैयार है वहां पर 22-23 दिसंबर 1949 की रात में रामललाकी मूर्ति परगट हुई थी मंदिर में मूर्ति प्रकट होते ही आसपास के लोगों ने मंदिर में आकर श्री राम का दर्शन करना शुरू कर दिया था दूर-दूर से लोग आकर मंदिर में भजन कीर्तन शुरू कर दिया लेकिन भजन कीर्तन के साथ-साथ तनाव की स्थिति भी पैदा हो गई.उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू देश में हालत बिगड़ने के चलते मंदिर के पक्ष में नहीं थे. इसके लिए जवाहरलाल नेहरू ने 26 दिसंबर 1949 को तत्कालीन घटना में दखल देने के लिए उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत को पत्र और टेलीग्राम के माध्यम से देश के गोविंद बल्लभ पंत पर मंदिर से मूर्ति हटाने के लिए दबाव बनाने लगे लेकिन
तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत की आत्म बल और संकल्प के चलते मंदिर से मूर्ति नहीं हटाई गई.

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गोविंद बल्लभ पंत जयंती के पदाधिकारीयो अपने संबोधन में कहा कि तत्कालीन देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू विवादित जगह से मूर्ति हटवाना चाहते थे और उन्होंने गोविंद बल्लभ पंत पर मूर्ति हटाने का लगातार दबाव बनाया लेकिन
सनातन प्रेमी तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने रामलला की अवतरित मूर्ति को नहीं हटने दिया और जवाहरलाल नेहरू के आदेशों को दरकिनार करते हुए माहौल ख़राब होने की आशंका के मद्देनज़र वहाँ ताला लगवा दिया.एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आज अयोध्या में रामलला के विराजमान होने की घड़ी नजदीक आ गई है जो पूरे देश के लिए गौरव की बात है.

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प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर गोविंद बल्लभ पंत के अमूल्य योगदान के लिए उनका हार्दिक अभिनंदन और प्रेमपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई.आयोजित कार्यक्रम में नैनीताल विधायक सरिता आर्या, ललित मोहन भट्ट कोऑर्डिनेटर गोविंद बल्लभ पंत जयंती उत्तराखंड, राजेश कुमार संयोजक पंत जयंती उत्तराखंड, पूरन मेहरा संयोजक गोविंद बल्लभ जयंती नैनीताल, दीप पंत संयोजक कुमाऊँ मंडल,
रईस अहमद पूर्व दर्जा राज्य मंत्री, गोविंद डंगवाल, आनंद जोशी, पूरन तिवारी, श्रीमती संगीता गंगोला मंडल अध्यक्ष भाजपा सहित भारी संख्या में महिलाएं और लोग मौजूद है.

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