कल है गोवर्धन व अन्नकूट पूजा, जाने शुभ मुहूर्त और पौराणिक मान्यता

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26 अक्टूबर बुधवार को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा। बुधवार को 13:23 बजे से विशाखा नक्षत्र आएंगे जो धाता योग का निर्माण करते है, क्योंकि गोवर्धन पूजा दुपहर बाद ही आरंभ होती है, ऐसे में यह योग बहुत ही कल्याणकारी है। वर्षों बाद गोवर्धन पूजा पर यह संयोग बना है।

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या तिथि के दिन दीपावली का त्योहार मनाया जाता है. इसके दूसरे दिन गोवर्धन पूजा होती है और फिर अगले दिन भैया दूज का त्योहार आता है. लेकिन इस बार इन सभी त्योहारों की तारीख में बड़ा फेरबदल हुआ है।

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26 अक्टूबर बुधवार को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा। बुधवार को 13:23 बजे से विशाखा नक्षत्र आएंगे जो धाता योग का निर्माण करते है, क्योंकि गोवर्धन पूजा दुपहर बाद ही आरंभ होती है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से विशाल गोवर्धन पर्वत को छोटी उंगली में उठाकर हजारों जीव-जतुंओं और इंसानी जिंदगियों को भगवान इंद्र के कोप से बचाया था। श्रीकृष्‍ण ने इन्‍द्र के घमंड को चूर-चूर कर गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी। इस दिन लोग अपने घरों में गाय के गोबर से गोवर्धन बनाते हैं कुछ लोग गाय के गोबर से गोवर्धन का पर्वत मनाकर उसे पूजते हैं तो कुछ गाय के गोबर से गोवर्धन भगवान को जमीन पर बनाते हैं।

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गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा की जाती है गोवर्धन पूजा के दिन 56 या 108 तरह के पकवानों का श्रीकृष्ण को भोग लगाना शुभ माना जाता है इन पकवानों को ‘अन्नकूट’ कहते हैं।

अन्नकूट का लगाया जाता है भोग

गोवर्धन की पूजा के दिन जहां भगवान कृष्ण को अन्नकूट प्रसाद तैयार कर भोग लगाकर प्रसाद खाने की परंपरा है। कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने इस प्रिय प्रसाद का हर वर्ष गोवर्धन पूजा करके भोग लगाकर अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा दी थी।

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गोवर्धन पूजा के दिन प्रमुख तौर पर कड़ी चावल और बाजरा बनाया जाता है जिसे अन्नकूट कहा जाता है. ब्रज के गोवर्धन में तो यह मुख्य आयोजन होता ही है इसके अलावा हर मन्दिर और घरों में भी अन्नकूट बनाया जाता है और इसे प्रसाद के तौर भी बांटा जाता है।ऐसी मान्यता है कि अन्नकूट पर्व मनाने से मनुष्य को लंबी आयु तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है साथ ही दरिद्रता का नाश होकर जीवन सुखी और समृद्ध रहता है।

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